Friday, 31 August 2018

मैं DEPRESSED नहीं हूँ

Hey there, How are you doing?
Hope,you are doing brilliant.

एक वाक़या आप सब के साथ शेयर करना चाहती हूँ | आज बहुत सालों बाद अपनी सहेली से बात हुई | FACEBOOK के ज़माने में किसी पुराने दोस्त या जानकार को ढूँढना आसान सा हो गया है | Messenger पर उसका नंबर लेते ही मैंने उसे फ़ोन मिला दिया , क्योंकि ख़ुशी ही इतनी थी | लम्बी गपशप के बाद  पता चला के वो भी अब गृहस्थ जीवन में व्यस्त है और एक प्यारी सी बिटिया की माँ है | उससे बात करते हुए एहसास हुआ के कुछ ठीक नहीं है , वो मुझे school  time  की तरह चहकती नहीं मिली | मुझसे रहा न गया और मैंने पूछ ही लिया,
"तेरी आवाज़ में आज वो खनक नहीं है khushi , कोई बात है तो मुझे बता सकती है | मैं और कुछ नहीं तो mental support  दे सकती हूँ | "
 इतना सुनते ही वो सकपका गई और फ़ोन रखने को कहा |
लेकिन इस conversation  के बाद मेरा मन बहुत विचलित था | कई दिन बीते और हमने मिलने का प्लान बनाया, मिलने के बाद पता चला के वो  DEPRESSION से गुज़र रही है , और अब उसके इलाज की चर्चा घर में आए दिन होती है, उसे बेटी को हैंडल नहीं करने दिया जाता, साफ़ लफ्ज़ो में कहूँ  तो उसे पागल समझा जाता है |

ख़ुशी से ये सारी बातें करने के बाद मेरे दिमाग में मेरी जानने वाली ५ और ऐसी females  आ गईं जो खुद को DEPRESSED समझती हैं /थीं  या फिर उन्हें DEPRESSED  समझा जाता है | इन ५  नामों में १ नाम और जोड़ देती हूँ जो कि  मेरा अपना नाम है | जी हाँ  एक टाइम पर मुझे भी ये लगने लगा था के मैं DEPRESSION में हूँ  और मुझे इलाज की ज़रूरत है | कैसे मैं उस feeling से बाहर आई आज वो आपको बताउंगी |

आजकल की fast  paced  life  में दो पल सुकून के मिल जाएं बहुत  हैं  लेकिन दुविधा ये ही है के हम ladies  इतनी सारी ज़िम्मेदारियाँ निभाती हैं के हम खुद को टाइम नहीं दे पाती | और ये ही असल वजह बन जाती है हमारी उदासी की जिसे हमारे आस पास के लोगों या फिर हमारे खुद के द्वारा DEPRESSION समझ लिया जाता है|

"मैं डिप्रेस्ड नहीं हूँ " इस बात का अंदाज़ा मुझे तब हुआ जब मैंने देखा के जो ५ महिलाएं ये ही बात कर रही हैं सबकी परेशानी है
1 अकेलापन :- बहुत सारी ज़िम्मेदारियाँ एक साथ निभा रही हैं
२. सुनने वालो की कमी  :- कई बार दिल हल्का करने के लिए १ कान ही काफी होता है
3. JUDGEMENTS :- सुनने के बाद जज किया जाता है
४ अपने लिए टाइम न निकाल पाना
५ अपने लक्ष्यों तक पहुँचता न दिखना

कुछ इसी तरह की similarities मुझे देखने को मिली , तब लगा मैं अकेली नहीं हूँ  इस क़तार  में | और तब अंतर्मन से आवाज़ आई के मैं DEPRESSED  नहीं हूँ | मुझे खुद पर काम करना है

अगर आप इस वाकये से relate कर पा रहें  हैं  तो कुछ पल शांत बैठ कर अपने मन की आवाज़ को सुनिए के वो क्या चाहता है, ऐसा क्या है जिसे करने के बाद मन  खुश हो जाएगा, बस वो ही चीज़ आपको अपने रूटीन में शामिल कर लेनी है |
ज़रूरी नहीं के कुछ करना ही है , अगर मन है के कुछ नहीं करना और कुछ पल फ़िज़ूल बैठना है  " तो बैठिये " आप सारा दिन किसी न किसी के लिए कुछ न कुछ करती हो २ पल अपने लिए निकाल  लोगी  तो बहुत ख़ुशी होगी |
आपका PASSION जो अधूरा है किसी भी कारण  से उसे पूरा करने की कोशिश करो
reading  की habit  डालो
अच्छे और positive  लोगों  से वास्ता रखो
हर किसी के आगे अपना मन ना खोलो
वो एक कान ढूंढो चाहे आपके life partner , friend , पडोसी ,आपका बच्चा , आपकी diary , कुछ भी जहाँ आप अपना मन हल्का कर सको और ये निश्चित हो के ये मुझे सुनेगा और सिर्फ सुनेगा |
"सुनेगा और सिर्फ सुनेगा" कहने का मक़सद ये है के कई बार हमें सही गलत की पहचान होती है, लेकिन उस एक पल में  लगता है कोई  सिर्फ सुन ले और जब मन हल्का हो जाए तो आप खुद से निर्णय ले पाओ क्या सही है क्या गलत|
अपना मनपसंद music  सुनो
अपने अपनों के साथ टाइम बिताओ
अपनी family और specially  friends  के साथ टाइम बिताओ , क्योंकि हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है
अपनी किसी कला को निखारो जिससे आपको नवाज़ा गया है  |
अपनी grooming पर ध्यान दो
Red lipstick  लगा लो, अरे हसो नहीं ये सच है बहुत बड़ा, चलो अभी try कर के देखो और अगर mood change हो जाए  तो इस ब्लॉग के निचे कमेंट करो

ये सारी चीज़े १ दिन में नहीं हो पाएंगी,ये सोचो के रोज़  ख़ुद पर काम करना है , ख़ुश रहना है, ख़ुश लोगों के साथ रहना है, जब जब मन उदास हो अपना ध्यान हटा कर वो काम करो या वो किस्से याद करो जिनसे आपका मन लग जाए | हर रोज़ कोशिश करो कुछ minutes अपने लिए निकालने की

ये सारी  बातें हर उम्र के लोगो पर लागू होती हैं , चाहे आप working हैं या नहीं हैं, married हैं, separated हैं, relationship में हैं, कुछ भी हैं, कोई भी situation है ये चीज़े फॉलो करेंगे तो बहुत हद  तक खुद को खुश पाएंगे


31.08.2018
Anonymous

इसी तरह के BLOGS मैं लिखती रहूंगी आप यूँ ही साथ बनाए रखिये





Saturday, 24 June 2017

Adopt good things

Hey there!
How are you doing?
Hope doing well and keeping well.
So I am here with a thought again.
जैसा की आप टाइटल देख कर समझ गए होंगे, आज की पोस्ट है मेरे अनुभवों पर निर्धारित। मैं किस तरह लोगो की अच्छी बातों को अपने जीवन में अमल करने की कोशिश करती हूँ। मैं अपने ब्लॉग्स के माध्यम से अपने experiences share करती हूँ। शायद किसी के काम ही आ जाए।
मैंने life में ये देखा है के आप अपने experiences से बहुत कुछ सीख सकते हैं।
कोई भी आ कर आपके अंदर कुछ feed नहीं कर सकता।
भाई हम इंसान हैं computer तो नहीं।
अगर मैं अपने बचपन के बारे में बात करूँ तो मैंने अपने घर पर बहुत कम समय बिताया है। मैं अक्सर अपनी बुआ, मासी, दादी, नानी के घर रहती थी। ऐसा नहीं के अपने घर में कोई तकलीफ थी, बस बात ये के कभी छुट्टियाँ हैं तो किसी के घर चले गए। जहां से प्यार मिला वहीं के हो गए, वो बात है।
इतने सारे लोगो के यहाँ जाने से, उनके रहन सहन, उनके तौर तरीक़ो को observe करना शुरू किया। मुझे जो बातें अच्छी लगती गई उन्हें अपना लिया। उस वक़्त उम्र खेलने कूदने की थी लेकिन इन चीज़ों में भी ध्यान चला जाता था।
आज जब मैं अपनी गृहस्थी संभालती हूँ तो लगता है के ये सब मुझे सिर्फ अपनी माँ से ही नहीं बल्कि मेरे परिवार की सभी महिलाओं से मिला। किसी का खाना बनाने का तरीका बहुत अच्छा था, किसी का साफ़ सफाई का। कोई बोलता मीठा था, तो कोई बहुत ही खुशमिजाज़ था।
एक बहुत important बात, आपने सुना होगा सीखने की कोई उम्र नहीं होती। ये बात दोनों तरफ लागू होती है। सीखने वाले पर भी और सिखाने वाले पर भी। कई बार आप अपने से कम उम्र के लोगो से या बच्चों से भी बहुत अच्छी बातें सीख जाते हैं।
उदाहरण के तौर पर,
मैं जब अपने 1.5 साल के बेटे को देखती हूँ, तो लगता है मैं इससे भी कितना कुछ सीख सकती हूँ। मैं अगर उस पर गुस्सा कर भी दूँ तो रोता हुआ मेरी ही गोद में आ जाता है। यहाँ से मैं सीख सकती हूँ बातों को भुला देना। मैं उसे खेल खेल में भी कह दूँ मुझे चोट लग गई फटाफट मुझे प्यार करने आ जाता है। ये मुझे सिखाता है caring।
तो दोस्तों, एक बात कह कर ब्लॉग ख़त्म करना चाहूंगी, के खामियां हम सब में हैं। इस धरती पर कोई perfect नहीं आया, न ही पूरी तरह से perfect हो सकता है। हमारा प्रयास ये ही होना चाहिये के जिस भी जगह से हम कोई भी अच्छी आदत अपनी ज़िन्दगी में अपना सके, तो ज़रूर अपनाइये। ये हमें ही एक बेहतर इंसान बनाने में मदद करेगा।
मैं हमेशा इस कोशिश में रहती हूं क्योंकि मुझमें अथाह खामियाँ हैं।
चलती हूँ दोस्तों,
मेरे साथ मेरे ब्लॉग्स पर यूँ ही बने रहिये।
Thank you

Friday, 23 June 2017

Never Judge, but understand

Hey there!
How are you?
Hope doing well and keeping well. Here again with another thought.

"I should not say this, I should not do this, people might not like it".
How many times does this come in your mind?
Well, in my mind it happens quite often(cant help😔)
Its not like I do this because I want to please everyone but sometimes there is a fear of getting judgements, sometimes it is fear of not hurting anyone.

उदाहरण के तौर पर एक वाकया साँझा करती हूँ
मेरी बहुत अच्छी सहेली, जिससे मेरा बहन की तरह प्रेम है। एक दिन उसने कुछ ख़रीदा और हमेशा की तरह मुझे दिखाया। मुझे खास पसंद नहीं आया या यूँ कहिये के अगर मैं होती तो वो न लेती। ज़ाहिर सी बात है दो लोग हैं ज़रूरी नहीं सबकी पसंद एक सी हो। उसने बड़े चाव से मुझे दिखा कर पूछा ये "कैसा है? आज ही ख़रीदा"
मैंने बिना सोच विचार के उसे कहा बहुत अच्छा है।
कुछ दिनों बाद मैंने कुछ कपडे ख़रीदे उसे दिखाए, उसने बड़ी आसानी से लिख दिया मुझे कुछ खास पसंद नहीं आए।
मेरा दिल वहीँ बैठ गया। क्योकि इस बार मैंने वो कपडे बड़े चाव से ख़रीदे थे। मुझे बहुत पसंद थे। लेकिन मैं चाहती थी वो भी ये कहे के अच्छे है।
मैंने कुछ समय दिया और सोचा के मेरे व्यक्तित्व में ये नहीं है लेकिन उसके व्यक्तित्व में ये है के वो जो सोचती है वो बोल देती है।
उस वक़्त मैंने सोचा मुझे निराश नहीं होना चाहिए, मुझे भी उसकी चीज़ इतनी पसंद नहीं आई और उसे मेरी। फ़र्क़ सिर्फ इतना है के उसने कह दिया और मैंने नहीं कहा।

How easy our lives would be if we will understand this concept, that other person can also have an opinion. Instead of making judgements about the person or getting annoyed we should understand one thing "THAT PERSONALITY IS DIFFERENT FROM ME. HE/SHE CAN HAVE OPINIONS. AND HE/SHE CAN SAY WHAT HE/SHE FEELS."

I know I very well understand this, I do get sad at that moment when my things get disliked or rejected but I always try to move on with this thought which i stated above.
This doesn't make me have grudges inside me against them.
I really wish everyone develop this understanding with others and dont judge people. If you are reading this post try to work on this and if you feel any changes in yourself pls comment and share.



Introduction

Hi,
I am Shivani. This is my first post on the blog and I want to keep it quite simple. Even you will see most of my blog posts are simple, nothing fancy because this is the way I am. I am a simple woman, yeah i called myself a woman,  क्योंकि बहुत जल्द मैं अपने तीस साल पूरे करने जा रही हूँ।
I am from a beautiful city in Madhya Pradesh. Now living in Mumbai, before this we were in Delhi for good 8 years.इन शहरों पर बात फिर कभी ज़रूर करेंगे। क्योंकि हर जगह मेरे दिल के बहुत क़रीब है।
If you meet Shivani for the first time, she is quiet, observing, nervous, conscious and might not talk much. But pls dont make opinions about me in the first meeting. "First impression is the last impression" doesn't work for me. I am in my true form when I am close to you or if we have spent time with each other. कोई भी बात मेरे दिल में नहीं रह पाती। कई बार कह देती हूँ कई बार लिख लेती हूँ। इनके भी अपने कारण हैं।
मेरा बेटा 1.5 साल का है। मेरा काफी वक़्त उसके साथ गुज़रता है, खाली समय में मैं लिखना पसंद करती हूँ। तो इसी तरह अपने खाली समय में मैं आपसे रूबरू होती रहूंगी, वक़्त के साथ साथ आप मेरे बारे में कई बातें जानते रहेंगे।
My blog is going to be around my life, some home remedies which I follow for myself or i have seen results on my closed ones, product reviews, baby talks, motherhood talks, parenting talks, everything that a woman goes through. This blog is not going to be centered on only one thing.

Please encourage me by subscribing to my blog and sharing it to as many people as you can.
मिलते हैं अगले ब्लॉग में।

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